राकेश मिश्र कानपुर

Just another weblog

361 Posts

225 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2541 postid : 1584

विस्थापितों ने मांगा राज्य को मिल रही मुफ्त बिजली में अपना हक

Posted On 27 Jan, 2013 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय नदी गंगा पर बने टिहरी बांध के ग्रामीण विस्थापितों ने राज्य को मिल रही मुफ्त बिजली में अपना हक मांगा है। 24 जनवरी को मुख्यमंत्री को दिये गये पत्र में उनसे मांग की गई है कि लिखा है कि राज्य सरकार को टिहरी बांध से मिलने मुफ्त बिजली संबधी सरकारी आदेश का जिक्र करते हुये पत्र में कहा गया है कि टिहरी बांध से मिल रही मुफ्त आमदनी को विस्थापितों पर खर्च किया जाये। पत्र साथ में है। जिसमें विस्तार से विषय को उठाया गया है।

विमल भाई  पूरणसिंह राणा

सेवा में]

श्रीमान विजय बहुगुणाजी

माननीय मुख्यमंत्री]

4] सुभाष रोड] मुख्यमंत्री कार्यालय]

उत्तराखण्ड सचिवालय]

देहरादून, उत्तराखण्ड-248001

फोन न0-0135-2650433] 2655177 फैक्स-2712827

संदर्भः टिहरी बांध के ग्र्रामीण पुनर्वास स्थलों की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करें

टिहरी बांध से मिल रही मुफ्त आमदनी को विस्थापितों पर खर्च करे।

मान्यवर]

टिहरी बांध से बिजली का उत्पादन भी हो रहा है जिससे राज्य सरकार को प्रतिदिन आमदनी भी हो रही है। जो आजतक करीबन्हजार करोड़ होगी। आप माननीय सुप्रीम कोर्ट में टिहरी बांध पर चल रहे एन0 डी0 जुयाल व शेखर सिंह बनाम भारत सरकार औरपुनर्वास पर चल रहे मुकद्दमों से परिचित होंगे ही। पूर्व राज्य सरकार ने अपने शपथ पत्र में पुनर्वास ना होने का कारण टिहरी हाइड्रोडेवलपमेंट कारपोरेशन ¼टी] एच] डी] सी]½ द्वारा पैसा नही देना बताया था। कोर्ट ने नवम्बर 2011 ¼टी] एच] डी] सी]½ आदेशमें पूर्व राज्य सरकार द्वारा मांगी गयी 102-99 करोड़ की राशि देने का आदेश दिया।

अभी भी माननीय सुप्रीम कोर्ट में पुनर्वास कार्य पूरा ना होने का कारण पैसे की कमी बताई जा रही है। आपने भी पिछले कई चुनावोंमें बार&बार पूर्व राज्य सरकार के बारे में कहा था कि वो टिहरी बांध विस्थापितों का पुनर्वास कार्य सही नही कर रही है। ंआपने2010 के मानसून में टिहरी बांध झील के आसपास के गांवों की तबाही के संदर्भ में भी कहा था कि राज्य सरकार को टिहरी बांध सेमिलने मुफ्त बिजली से जो आमदनी हो रही है उसे टिहरी बांध विस्थापितों के लिये खर्च करना चाहिये। आपका यह सुझाव ऊर्जामंत्रालय की ”Guidelines for development of Hydro Electric Projects Sites” 23 मई 2006 के अनुरूप है जिसमें पेज न0 10 परलिखा है कि बांध से दी जाने वाली मुफ्त बिजली की आमदनी को बांध विस्थापितों पर खर्च किया जाये।

नीति का संबधित हिस्साः-

2.3 Provision of 12% free power to the home state Government of India, vide its O.M. dated 17th May, 1989 have approved that “since the Home States are increasingly finding it difficult to locate alternative land and resources for rehabilitation of the oustees in hydro-electric projects. They, need to be suitably assisted by giving incentives, such as the (proposed) 12% free power, to enable them to take care of the problems of rehabilitation in the areas affected by the hydro-electric projects.

Without such assistance and incentives, considerable hydel potential of the country would remain unutilized. Accordingly, the State Government shall be entitled to realize 12% free power from the project for local area development and mitigation of Guidelines for development of Hydro Electric Projects Sites hardships to the project affected people in line with the Govt. of India policy”.

इसी संदर्भ में हम कहना चाहते है किः-

पथरी भाग 1] 2] 3 व 4 हरिद्वार के ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले टिहरी बांध विस्थापितों के मामले 30 वर्षाे से लंबित है। यहंा लगभग 40 गांवो के लोगो को पुनर्वासित किया गया है। यहंा 70 प्रतिशत विस्थापितों को भूमिधर अधिकार भी नही मिल पाया है। बिजली] पानी] सिंचाई] यातायात] स्वास्थय] बैंक] डाकघर] राशन की दुकान] पचांयत घर] मंदिर] पितृकुटटी] सड़क] गुल]नालियंा आदि और जंगली जानवरों से सुरक्षा हेतु दिवार व तार बाढ़ तक भी व्यवस्थित नही है। बीसियों वर्षो से यह सुविधायें लोगो को उपलब्ध नही हो पाई है। यदि कहीं पर किसी तरह से कुछ व्यवस्था बनी भी है तो स्थिति खराब है। स्कूल भी कुछ ही वर्षो पहले बना है वो भी मात्र 10वीं तक है। प्राथमिक स्कूलों की इमारतें बनी है पर अघ्यापक नही है। स्वाथ्य सेवायें तो है ही नही। रास्ते सही नही है तो निकासी नालियां भी नही है। यातायात की सुविधायें भी नही है। लोगों को मात्र जगंल में छोड़ दिया गया है। अपने बूते पर विस्थापितों ने मकान बनाये है।

11 जून 2012 को हरिद्वार क्षेत्र के शिवालिक नगर स्थित पुनर्वास कार्यालय के अधिकारी उप-अधिशासी अभियंता श्री राजेश नौटियाल ने बताया की हरिद्वार पुनर्वास क्षेत्र के लिये 4 करोड़ रुपये की मंजूरी हुई है। पैसा आने पर ही काम शुरु होगा। किन्तु इन कामों में उपरलिखित कोई भी काम नही है। जबकि यह मूलभूत समस्यायें है।

टिहरी बांध से मिलने मुफ्त बिजली से जो आमदनी हो रही है उसे टिहरी बांध विस्थापितों के लिये खर्च करना चाहिये। पथरी भाग1] 2] 3 व 4 हरिद्वार के ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले टिहरी बांध विस्थापितों के 30 वर्षाे से लंबित कार्यो के निपटान के लिये इस राशि का उपयोग करना चाहिये।

आपसे हमारी मांग है कि निम्नलिखित विषयों पर तुरंत कार्यवाही का आदेश करेंः-

  • भूमिधर अधिकार तुरंत दिये जाये। यदि वन भूमि की समस्या है तो इस बारे में आप केंद्रीय पर्यावरण एंव वन मंत्रालय से स्वंय बात करें और विस्थापितों को भूमि अधिकार दिलायें।

  • ऊर्जा मंत्रालय की नीति के अनुसार विस्थापितों को मुफ्त बिजली दिये जाने के प्रावधान को लागू करें। इस विषय में केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय से बात करें।

  • शिक्षा] स्वाथ्यय] यातायात] सिंचाई व पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधायें तुरंत पूरी की जाये। इन कार्यो के लिये टिहरी बांध परियोजना से] जिसमें कोटेश्वर बांध भी आता है] मिलने वाली 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली के पैसे का उपयोग किया जाये।

  • सभी कार्यों के लिये विस्थापितों की ही समितियंा बनाकर काम दिया जाये ताकि कार्य की गुणवत्ता बने और सही निगरानी भी हो सके।

इस समय केन्द्र व राज्य में आपकी ही सरकार है। नये बांधों को बनाने से पहले कार्यरत बांधों के विस्थापन-पर्यावरण की समस्याओं का निदान आवश्यक व न्याय की मांग है।

अपेक्षा में

विमलभाई]   पूरणसिंह राणा]  बलवंत सिंह पंवार]     जगदीश रावत

Matu Jansangthan
Visit our blog<matuganga.blogspot.com>
some films on youtube, just type –bandh katha
For Correspondence only:-
D-334/10, Ganesh Nagar, Pandav Nagar
Delhi-110092

 

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran